समस्या अपनी तो लड़ों भी खुद

मुझे इस बात का आश्चर्य है कि रोज-न-रोज कोई न कोई सरकारी कम्पनी के बिकने की सूचना आती रहती है लेकिन समाज चुपचाप क्यों बैठा है ? विशेष रुप से दलित – आदिवासी क्यों श्मशान की शांति के माहौल में जी रहे हैं , इनके लिए तो मरने जीने का प्रश्न है | घर हो या कार्यस्थल चर्चा तो करते हैं लेकिन समाधान खोजने के लिए आगे नहीं आते | कभी नेताओं पर भड़ास निकाल लेना तो कभी और गैरों को जिम्मेदार ठहराना लेकिन स्वयम व्यक्तिवादी एवं अहंकारी बने रहते हैं | बहुत कुछ न करें तो कम से कम इतना तो करें कि जब बड़ा आन्दोलन हो तो साथ तो दे दें और कुछ आर्थिक सहयोग भी दे | जिस तरह से भावुक मुद्दों पर लाखों लोग इकट्ठा हो जाते हैं अगर संविधान बचाने और निजीकरण के खिलाफ एकत्र हों तो मैं गारंटी के साथ कहता हूँ कि सरकारी विभागों और कम्पनियों का निजीकरण रोंक दूंगा | 1 दिसम्बर 2019 को रामलीला मैदान नई दिल्ली में विशाल रैली है आपसे आह्वाहन है कि लाखों की संख्या में इकट्ठा हों | व्हाट्सएप नं या
फोन नं 9899766443 पर सहयोग और सुझाव के लिए सम्पर्क करें |

नोट – आपसे आग्रह है कि जिस भी रूप में आप रैली को सफल बनाने में सहयोग दे सकते हैं हमें मैसेज करें आपका मैसेज स्वयं डॉ उदित राज पढेंगे और बात भी करेंगे | कई प्रकार के सहयोग दिए जा सकते हैं जैसे कि कितनी संख्या में रैली में आप उपस्थित होंगे या रैली के तयारी हेतु कोई बैठक करा सकते हैं | किसी को जोड़ सकते हैं या कोई सुझाव , आर्थिक सहयोग के लिये परिसंघ का खाता संख्या – 30899921752 (State Bank of India) दिया जा रहा है |

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