डॉ. उदित राज ने आज लोक सभा में न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुद्दों से संबधित समस्या का मुद्दा उठाया



डॉ उदित राज ने आज लोक सभा में न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुद्दों से संबधित समस्या का मुद्दा उठाया नई दिल्ली, 2 अगस्त 2018, न्याय के लिए आम जनता को सालों-साल लग जाते हैं और कभी- कभी तो उम्र गुजर जाती है लेकिन न्याय नहीं मिल पाता है | इस गंभीर मसले को ध्यान में रखते हुए सांसद डॉ. उदित राज जी ने आज अतारांकित प्रश्न के अंतर्गत विधि और न्याय मंत्री से पूछा कि क्या सरकार को सत्र न्यायालयों और जिला न्यायालयों में विभिन्न आपराधिक और सिविल मामलों की समयबद्ध सुनवाई के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और यदि हाँ तो ऐसी प्रस्तावों के कार्यान्वयन की क्या स्थिति है ? इसपर विधि और न्याय तथा कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री पी. पी. चौधरी ने जवाब में कहा कि अनेक विशेषज्ञ समितियों ने जिनमे भारत का विधि आयोग भी है, मामलों के विलम्बित निपटान के कारणों का अध्ययन किया है, की गयी सिफारिशों के आधार पर, आपराधिक और सिविल मामलों की समयबद्ध सुनवाई और शीघ्र निपटारे को समर्थ बनाने के लिए प्रक्रियात्मक विधियां अर्थात दंड प्रक्रिया संहिता और सिविल प्रक्रिया संहिता अनेक उपबंध समाविष्ट किये गए हैं | इनमे अन्य बातों के साथ अनावश्यक स्थगनों को निरुत्साहित करने वाले संशोधन, दाण्डिक मामलों में ऑडियो/वीडियो प्रोद्यौगिकी के उपयोग को अनुज्ञात करने वाले संशोधन, स्थगनों के लिए खर्च का अधिरोपण, ई-मेल, फैक्स, स्पीड पोस्ट, कुरियर सेवाओं का उपयोग करते हुए सामनों को तामील करना, और लिखित कथन फाइल करने के लिए सीमा को परिसीमित करना भी है | इसके अतिरिक्त विनिर्दिष्ट विधियों में इन नियमों के अधीन शासित मामलों में विचरण के पूरा किये जाने के लिए उपबंध करती है | उदाहरण के लिए, वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग ादीनियम 2015 यह उपबंध करता है कि न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि दलीलें प्रथम मामला प्रबंध सुनवाई की तारीख से 6 माह के अपश्चात समाप्त हो जाती है और न्यायालय यथा शक्य, यह सुनिश्चित करेगा कि साक्ष्य का अभिलेखन दिन-प्रतिदिन के आधार पर तब तक किया जायेगा जब तक सभी साथियों की प्रति परीक्षा पूरी नहीं हो जाती है | इसी प्रकार बालकों का लैंगिग अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 में यह उपबंध है कि किसी बालक का साक्ष्य तीस दिन की अवधि के भीतर विशेष न्यायालय द्वारा अभिलिखित किया जाना है और विचारण अपराध के संज्ञान के लिए जाने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर ही, यथाशक्य पूरा किया जाना चाहिए | अन्य उदाहरण सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम २००० का है जो यह उपबंध करता है कि साइबर अपील अधिकरण के समक्ष कोई अपील पर यथासंभव शीघ्र कार्यवाई की जायेगी और छह माह के भीतर अपील का निपटारा करने का प्रयास किया जायेगा | Thanks & Regards Vaibhav Mishra Cell: 91-9911528047

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