बाबा साहेब डॉ0 अम्बेडकर की 124वीं जयंती पर परिसंघ द्वारा नए आंदोलन का उद्घोष



राज्य मंत्री, किरन रिजीजू., सांसद, मीनाक्षी लेखी एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा, सतीश उपाध्याय ने भी समारोह को संबोधित किया

नई दिल्ली, 14 अप्रैल, 2015. अनुसूचित जाति/जन जाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद, डॉ0 उदित राज के नेतृत्व में आज संसद मार्ग, नई दिल्ली पर सैकड़ों संगठनों ने अपने बैनर, पोस्टर के साथ स्टाल लगाए और समारोह में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। समारोह को डॉ0 उदित राज जी के अलावा भारत सरकार में गृह राज्य मंत्री, श्री किरन रिजीजू, सांसद, श्रीमती मीनाक्षी लेखी एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, श्री सतीश उपाध्याय ने भी समारोह को सम्बोधित किया। श्री किरन रिजीजू ने कहा कि मोदी सरकार में वे अकेले बौद्ध मंत्री है और दलितों व गरीबों की पीड़ा को महसूस करते हैं और किसी भी दलित के साथ जातीय भेदभाव व उत्पीड़न कदापि बर्दाश्त नहीं करूंगें, यदि किसी प्रकार का ऐसा मामला मेरे संज्ञान में लाया जाता है तो तुरंत कार्यवाही होगी। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार से अपने हितों को सुरक्षित कराने की अपेक्षा करते हैं तो दलितों की आवाज उठाने वाले एकमात्र सांसद, डॉ0 उदित राज को समर्थन देकर मजबूत बनाएं। सांसद एवं दिल्ली नगर पालिका परिषद की चेयरमैन, श्रीमती मीनाक्षी लेखी से आयोजकों ने एन.डी.एम.सी. मेें कार्यरत् दलित कर्मचारियों की हितों की रक्षा का आवाहन करते हुए जब संबोधन के लिए बुलाया तो श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी ने कहा कि जैसे ही वे एन.डी.एम.सी. की चेयरमैन बनीं तुरंत ही ठेके और दिहाड़ी पर कार्य कर रहे 8500 लोगों को स्थायी कर दिया लेकिन मीडिया ने इसे कोई तवज्जो नहीं दिया, जिससे आप लोगों तक यह संदेश नहीं पहुंच पाया। उन्होंने दलितों व गरीबों की हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। श्री सतीश उपाध्याय ने उपस्थित लोगों को बाबा साहेब के जन्मदिवस की शुभकामनांए दीं और कहा कि जरूरी नहीं है कि बाबा साहेब की जयंती सिर्फ अनुसूचित जाति/जन जाति के लोग ही मनाएं, हम सभी को मिलकर मनाना चाहिए, क्योंकि बाबा साहेब का योगदान दूरे देश के लिए है।

डॉ0 उदित राज जी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि आज डॉ0 अम्बेडकर की 124वीं जयंती के उपलक्ष्य पर संसद मार्ग से घोषणा किया कि उनके विचारों और दर्शन को सही रूप में लागू करने के लिए एक नए आंदोलन की आवश्यकता है। इस अवसर पर परिसंघ की पूरे देश की सभी इकाइयों के द्वारा दस लाख सदस्यता के लक्ष्य की प्राप्ति की शुरुआत की गयी। आज इस समारोह में हजारों लोगों ने सदस्यता ली। दलित व आदिवासी नेताओं ने कहीं ज्यादा डॉ0 अम्बेडकर के सिद्धांतों को अपनी सुविधानुसार व्यक्तिगत् हित में इस्तेमाल किया है। उन्होंने पूरे जीवन जातिविहीन समाज की स्थापना की लड़ाई लड़ी, लेकिन आज हम देखते हैं कि जाति का सहारा लेकर नेता बनना, विधान सभाओं एवं संसद में पहुंचना, तक सीमित रह गया है। इससे न केवल दलित समाज का अहित हो रहा है, बल्कि राष्ट्र की भी क्षति है। हजारों वर्षों तक देश दूसरों के अधीन था, इसलिए कि यहां का समाज हजारों टुकटों में विभाजित था। जब दलित नेता जातिवाद करें तो ठीक है और सवर्ण करंें तो बुरा, यह नहीं चलेगा।

डॉ0 उदित राज ने कहा कि समाज को बदलने का कार्य मूलरूप से कर्मचारी-अधिकारी ही कर सकते हैं, न कि सांसद और विधायक। सांसद और विधायकों की संख्या हजार पार नहीं कर सकेगी लेकिन कर्मचारियों व अधिकारियों की संख्या 20 लाख से भी अधिक होगी। चाहे दलित उत्थान हो या राष्ट्र निर्माण हो, अगर सबसे ज्यादा जरूरत है तो सामाजिक शिक्षा की। ये कर्मचारी-अधिकारी ही समाज को बदल सकेगेें। ऐसा परिसंघ का मानना है। परिसंघ की देश की कोने-कोने में शाखाएं हैं, अब इसके कार्यकर्त्ताओं को नकली समतामूलक और मानवतावादी कार्यकर्त्ताओं और नेताओं की असलियत बताने का समय आ गया है। परिसंघ ने कभी सवर्णों की आलोचना करके दलितों को एकजुट करने का कार्य नहीं किया, बल्कि डॉ0 अम्बेडकर के सिद्धांतों पर चलकर संघर्ष किया। परिसंघ वर्तमान में भूमिअधिग्रहण अध्यादेश का समर्थन करता है, क्योंकि जब तक आद्यौगीकरण नहीं होगा तब तक रोजगार सृजित नहीं हो पाएंगें। दलितों के पास जमीन भी कम है और इसीलिए बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं। इंडस्ट्रियल कोरीडोर बन जाने से करोड़ों रोजगार पैदा होगें, बड़े शहरों पर आबादी का भार भी कम होगा, कृषि पर आधारित जनसंख्या भी कम होगी।

परिसंघ अपनी पूर्व मांगें, जैसे - पदोन्नति में आरक्षण, आरक्षण कानून बनाना, खाली पदों पर भर्ती, अनुसूचित जाति/जन जाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को मजबूत करना, शिड्यूल्ड कास्ट सब प्लान एवं ट्राइबल सब प्लान को आबादी के अनुपात में योजनागत् बजट की राशि आबंटित कर दलितों-आदिवासियों के उत्थान, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति, निजी क्षेत्र में भागीदारी, जाति प्रमाण-पत्रों की समस्या आदि के लिए और मजबूती से डॉ0 अम्बेडकर की 124वीं जन्मसदी पर संकल्प दोहराया।

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