डॉ0 उदित राज ने वित्तमंत्री को ज्ञापन सौंपा



डॉ0 उदित राज, सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अनुसूचित जाति/जन जाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आज वित्त मंत्री, अरूण जेटली से उनके साउथ ब्लाक स्थित कार्यालय पर 11:45 बजे मुलाकात करके एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से शिड्यूल्ट कास्ट स्पेशल कांपोनेंट प्लान एवं ट्राइबल सब प्लान पर सुझाव दिए और दलितों के उत्थान हेतु बजट में विशेष प्रावधान करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में डॉ0 उदित राज के अलावा परिसंघ के महासचिव - ब्रह्म प्रकाश, संरक्षक - दीपक वोहरा, फैशन डिजाइनर - सोनिया गुरनानी आदि शामिल थे।

डॉ0 उदित राज जी ने कहा कि यदि आरक्षण शासन-प्रशासन में दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करता है तो एससीपी एवं टीएसपी उनके आर्थिक उत्थान का उपाय है। पिछले कुछ सालों से जिस तरह की गतिविधियां चल रही है उससे एससीपी एवं टीएसपी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पा रहा है। एससीपी एवं टीएसपी किसी भी तरह से असफल न हो इसके लिए डॉ0 उदित राज जी ने आगामी आम बजट हेतु सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि हमेशा से यह मांग उठती रही है कि नए दिशानिर्देश जारी करके एससीपी एवं टीएसपी के फंड का प्रारूप कम से कम बजट सत्र के प्रारंभ होने से 6 महीने पहले चिन्हित कर लिया जाना चाहिए, जिससे यह पता लग जाए कि एससीपी योजना के तहत जो फंड आबंटित किया जाएगा वह उन्हीं के विकास पर खर्च होगा । केन्द्र और राज्य स्तर पर मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा एस.सी.पी. एवं टी.एस.पी. के धन को उचित रूप से लागू करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी जैसे ज्वाइंट सेक्रेटरी को समुचित स्टाफ के साथ प्रकोष्ठ बने, जो यह देखे कि अजा/जजा के किन विकास कार्यों पर धन खर्च किया जाना है, जिससे कि मंत्रालय एवं विभाग इनके विकास हेतु योजनाओं को अलग से प्रदर्शित कर सकें। इसी संस्था के द्वारा एससीपी/टी.एस.पी. की योजनाओं हेतु धन का आबंटन, कार्यान्वयन एवं निगरानी किया जाना चाहिए। एससीपी/टीएसपी फंड के लिए यह भी निर्देशित किया जाना चाहिए कि इसका उपयोग वहीं किया जाना चाहिए जहां पर अजा/जजा वर्ग के व्यक्तियों, परिवारों, एवं बस्तियों का विकास होना है। एस.सी.पी./टी.एस.पी. की योजनाओं की गहन निगरानी होनी चाहिए एवं सूचनाएं सार्वजनिक की जानी चाहिए जिससे कि सभी को पता लग सके कि किस व्यक्ति, परिवार एवं बस्ती के विकास हेतु इसके धन का प्रयोग किया गया है। इस योजना का सामाजिक लेखा-जोखा भी होना चाहिए। विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, की एससीपी योजना और धन के आबंटन के वार्षिक आकलन हेतु नीति आयोग के अंतर्गत मुख्य सलाहकार और उचित संख्या में कर्मचारी नियुक्त करके अलग से इकाई गठित की जानी चाहिए। नीति आयोग की यह यूनिट उच्च स्तरीय समितियों का भी सचिवालय हो। विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में एसीपी योजनाओं के स्वतंत्र मूल्यांकन हेतु राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एवं राष्ट्रीय जन जाति आयोग को अपेक्षित संख्या में जनबल एवं व्यावसायिक विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाने चाहिए। ऐसा प्रावधान हो कि विभिन्न विभागों एवं मंत्रालयों की योजनाएं बनाते समय अजा/जजा वर्ग की जरूरत के हिसाब से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग स्वयं भी योजनाओं की संस्तुति और सलाह दे सके। राज्य स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित की जानी चाहिए, जिसका कार्य एससीपी नीतियों के निर्धारण, योजनाओं के अनुमोदन, और निगरानी करने की होनी चाहिए। केन्द्रीय विभाग को यह अधिकार होना चाहिए कि वह उन्हीं नीतियों को अनुमोदित करे, जो अजा/जजा वर्ग के व्यक्ति, परिवार व बस्ती के उत्थान हेतु सीधे-सीधे सहायक हो।

उन्होंने देश में अजा/जजा वर्ग की मौजूदा स्थिति के बारे में वित्तमंत्री महोदय को एक विस्तृत नोट सौंपा। उन्होंने मांग की कि एससीपी/टीएसपी को लागू करने हेतु एक विस्तृत कानून आंध्र प्रदेश अजा/जजा सब-प्लान विधेयक, 2013 की तर्ज पर संसद में पास होना चाहिए।

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