महिलाओं की भागेदारी से ही सशक्तिकरण संभव : डॉ. उदित राज



नई दिल्ली, 24 सितम्बर 2017: अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज के नेतृत्व में आज परिसंघ की महिला प्रकोष्ठ द्वारा एकदिवसीय “महिला सशक्तिकरण एवं आरक्षण एक सामाजिक सुरक्षा” परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन सत्याग्रह मंडप, गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट में किया गया | पिछले कुछ समय में पूरे देश के अलग-अलग कोनों में दलित महिलाओं के साथ लगातार अत्याचार और शर्मसार करने वाली घटनाओं की संख्या बढती जा रही है | जिसे देखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया कि आखिर कब तक दलित महिलाएं इस अत्याचार की पीड़ा को सहन करेंगी और उन्हें कब भागेदारी दी जाएगी | इस कार्यक्रम में पूरे देश के विभिन्न प्रान्तों से सैकड़ों दलित महिलाओं ने हिस्सा लिया |

परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ सोचने मात्र से नहीं हो सकता बल्कि उन्हें पुरुषों की ही भांति बराबरी का अधिकार देना पड़ेगा | यह देश हजारों वर्षों से पुरुष प्रधान रहा है और महिलाओं को हमेशा से ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा है और अभी भी ग्रामीण इलाकों में स्थिति जस की तस बनी हुई है | सिर्फ दलित ही नही सवर्ण जाति की महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है | बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का सपना था कि महिलाएं चाहें दलित समाज से हो या सवर्ण समाज से, सभी वर्ग की महिलाओं को बराबर का सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए | बाबा साहब का मानना था कि इस देश की आधी आबादी महिलाओं की है यदि उनकी भागेदारी नहीं होगी तो देश का विकास संभव नहीं हो सकता है | डॉ. उदित राज ने आगे बोलते हुए कहा कि मैं खुद कई देशों में गया हूँ और वहां देखा है कि किस प्रकार महिलाओं की भागेदारी पुरुषों के बराबर है और कहीं-कहीं तो पुरुषों की तुलना में ज्यादा भागेदारी महिलाओं की देखी जा सकती है |

कार्यक्रम का संचालन परिसंघ की महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजिका सविता काद्यान ने किया और कहा कि डॉ. उदित राज के नेतृत्व में हम इस मुहीम को और मजबूती से आगे बढ़ाएंगे | जो महिलाएं शिक्षा से वंचित रह जाती उनके लिए आज के समय में जीवनयापन करना बेहद मुश्किल काम हो रहा है और उन्हें न ही कोई अधिकार दिया जाता है और न ही पुरुषों की तरह भागेदारी | ऐसे में हम सबको मिलकर अपने लिए ही नहीं बल्कि उन वंचित महिलाओं के अधिकार और सम्मानके लिए आवाज़ उठाने की जरुरत है | इस कार्यक्रम में दिल्ली से रीटा सरकार, नागपुर से अर्चना भोयर, निर्भया कांड आन्दोलन में प्रमुख समाजसेवी योगिता भयाना, झारखण्ड से उर्मिला कच्छप और उषा मधुसुदन ने भी कार्यक्रम में भाग लिया |

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