कुमार विश्वास जी बताएं कि उनकी दादी ब्याह के साथ सफाई करने वाली के लाने को मानव तस्करी नहीं तो क्या ?



नई दिल्ली, 4 दिसम्बर 2017 : डॉ. उदित राज, अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री कुमार विश्वास ने कहा कि उनकी दादी माँ के साथ सफाई करने वाली लक्ष्मी अम्मा आयीं थी | जाहिर सी बात है अन्य वस्तुएं जैसे वो भी दहेज़ में लायी गयी थी | यह मानव तस्करी के परिधि में आता है लेकिन वो जिन्दा नहीं है वरना मुकदमा चलाया जाता | इनकी माँ और चाची घूँघट ठीक न रखने पर लक्ष्मी अम्मा ने डांटा तो क्या उससे सामाजिक स्तर बदल गया | लक्ष्मी अम्मा की डांट को दादा- दादी ने इसलिए समर्थन किया कि औरतों को घूँघट में रखने की परंपरा थी | कम से कम विश्वास जी को इस गुलाम प्रथा का समर्थन नही करना चाहिए लेकिन विडियो में देखने से लगता है जैसे कोई सम्मान की बात हो | जिस जाति व्यवस्था की इन्हें निंदा करनी चाहिए और उसी कि महिमा मंडित कर रहे हैं क्यों कि उस जाति व्यवस्था में सफाई करने वाली मेहतरानी पढ़-लिख नही सकती थी और न ही शासन -प्रशासन में भागेदार | आश्चर्य होता है कि आम आदमी पार्टी ने इस पर कोई रुख नहीं जाहिर किया इससे लगता है की ये दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को कमतर देखते हैं और सामंती व्यवस्था के समर्थक है |

डॉ. उदित राज ने आगे कहा कि आरक्षण सबसे पहले बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर ने दिया | अब कुमार विश्वास खंडन कर रहे हैं कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी. पी. सिंह के लिए कहा जिन्होंने मंडल कमीशन की घोषणा की | यहाँ भी इनकी कुत्सित मानसिकता झलकती है कि जैसे पिछड़ों को अगर सरकारी नौकरिओं में अगर आरक्षण दिया गया तो उससे जातीय ढांचा टूटा | बिना जातीय ढांचा तोड़े देश में समता मूलक समाज नही स्थापित किया जा सकता है और न ही ग्लोबल पॉवर | आरक्षण का आन्दोलन वी.पी सिंह जी ने कभी नहीं चलाया बल्कि प्रधानमंत्री होते हुए मंडल कमीशन लागू करने की घोषणा की | वी.पी सिंह जी मंडल कमीशन की घोषणा की थी और लागू करने का कार्य सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में किया था | श्री विश्वास चाहते है कि जातीय ढांचा वही बना रहे जो पुराने ज़माने में था जिसमे दलित, पिछड़े और महिलाओं की भागेदारी नही हुआ करती थी और वो गुलाम कि भांति रहते थे |

श्री कुमार विश्वास ने यह आरोप लगाया कि 2019 में भारतीय जनता पार्टी देश की धार्मिक ढांचा तोड़ देगी | जिसका नुक्सान हजारों वर्ष तक रहेगा | सीधे तौर पर इन्होने भारतीय जनता पार्टी पर देश का धार्मिक ढांचा तोड़ने का आरोप लगाया है | देश में दलित, पिछड़े बहुत ही आन्दोलनरत है और इनकी निंदा की जा रही है | हर जगह से यही प्रश्न उठ रहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता श्री अरविन्द केजरीवाल क्या सहमत हैं ? सहमत न होते तो अभी तक अपना रुख स्पष्ट करते | आगामी 26 दिसम्बर को रामलीला मैदान, न्यू दिल्ली में अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के द्वारा विशाल रैली होगी जिसमे ये मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जायेगा |

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